नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आमरण अनशन की शुरुआत की। अनशन के पहले ही दिन छह छात्रों ने भी उनके साथ भूख हड़ताल में शामिल होकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थक और सामाजिक कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।
सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख से जुड़े सामाजिक, पर्यावरणीय और विकास संबंधी मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र के लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और उनके हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
छात्रों ने दिखाई एकजुटता
अनशन में शामिल छह छात्रों ने कहा कि वे युवाओं की भागीदारी के माध्यम से जनहित के मुद्दों को मजबूत आवाज़ देना चाहते हैं। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध और संवाद के जरिए सकारात्मक समाधान निकाला जा सकता है। छात्रों ने यह भी कहा कि वे सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से इस आंदोलन का हिस्सा बने हैं।
शांतिपूर्ण आंदोलन पर विशेष जोर
आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार के टकराव से बचने की अपील की गई। आयोजकों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल अपनी मांगों को जिम्मेदार संस्थाओं तक पहुंचाना है। उन्होंने समर्थकों से अनुशासन बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन में शामिल होने का आग्रह किया।
जनसमर्थन बढ़ने की उम्मीद
आंदोलन के पहले दिन ही कई सामाजिक संगठनों, युवाओं और नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस अभियान को और अधिक लोगों का समर्थन मिल सकता है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे जनहित से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा चाहते हैं और सकारात्मक संवाद के लिए हमेशा तैयार हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल अनशन जारी है और आंदोलन की आगामी रणनीति परिस्थितियों तथा संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया के आधार पर तय की जाएगी। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सार्थक पहल नहीं होती, तब तक उनका शांतिपूर्ण अभियान जारी रहेगा।
