टीएमसी के लिए स्टार प्रचारक रहीं सायनी घोष
सायनी घोष पिछले कुछ वर्षों में तृणमूल कांग्रेस का एक बड़ा युवा चेहरा बनकर उभरी थीं। विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पूरे बंगाल में हाई-वोल्टेज प्रचार अभियान चलाया था। अपने अलग अंदाज, भाषणों और गीतों के जरिए उन्होंने युवाओं के बीच खास पहचान बनाई थी। पार्टी के कई बड़े कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी चर्चा का विषय रहती थी।
बीजेपी पर तीखे हमलों से चर्चा में आई थीं
चुनाव प्रचार के दौरान सायनी घोष ने बीजेपी पर कई बार तीखे तंज कसे थे। उन्होंने एक रैली में कहा था कि बीजेपी चुनाव के समय जनता से साथ निभाने की बात करती है लेकिन बाद में वही जनता का साथ छोड़ देती है। उनका यह बयान काफी वायरल हुआ था और टीएमसी समर्थकों के बीच खूब पसंद किया गया था।
सायनी घोष ने अपने भाषणों में भावनात्मक और आक्रामक दोनों तरह की राजनीतिक शैली अपनाई थी। यही वजह थी कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें युवा वोटरों तक पहुंचने का बड़ा चेहरा बनाया था।
ममता बनर्जी से होती थी तुलना
राजनीतिक गलियारों में सायनी घोष की तुलना कई बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से की जाती रही। इस तुलना पर उन्होंने कभी आपत्ति नहीं जताई। बल्कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्हें खुशी होती है जब लोग उनकी तुलना ममता बनर्जी से करते हैं।
सायनी का कहना था कि वे ममता बनर्जी की तरह जमीन से जुड़ी राजनीति करना चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि जिस पार्टी में वे हैं, वहां रहकर उनका व्यक्तित्व उसी विचारधारा से जुड़ा दिखाई देगा।

“घोष, घोष रहेगा” वाला बयान फिर चर्चा में
सायनी घोष का एक पुराना बयान अब फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। उस समय उन्होंने कहा था कि “मेरा नाम चड्ढा नहीं है, चड्ढा चड्ढी बन सकता है लेकिन घोष, घोष रहेगा।” यह बयान उन्होंने उस समय दिया था जब दल बदल को लेकर राजनीति गरमाई हुई थी।
तब उन्होंने साफ संकेत दिए थे कि वे ममता बनर्जी और टीएमसी के साथ मजबूती से खड़ी हैं। लेकिन अब उन्हीं के पार्टी से दूरी बनाने की खबरों ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बागी सांसदों की सूची में नाम आने से बढ़ी हलचल
सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी से अलग होने की तैयारी कर रहे कुछ सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ असंतोष जताया है। इसी दौरान सामने आई सूची में जादवपुर से सांसद सायनी घोष का नाम भी बताया जा रहा है।
हालांकि अभी तक सायनी घोष की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक बैठकों और उनकी हालिया चुप्पी ने अटकलों को और तेज कर दिया है।
चुनावी हार के बाद भी ममता ने जताया था भरोसा
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ममता बनर्जी ने सायनी घोष पर हमेशा भरोसा जताया। चुनावी हार के बाद जब पार्टी संगठन में बड़े बदलाव किए गए, तब भी सायनी घोष को अहम जिम्मेदारी दी गई थी।
उन्हें टीएमसी यूथ विंग का अध्यक्ष बनाया गया था। यह फैसला इस बात का संकेत माना गया था कि पार्टी नेतृत्व उन्हें भविष्य के बड़े चेहरे के रूप में देख रहा है।

पिछले कुछ दिनों की चुप्पी बनी चर्चा का विषय
टीएमसी के अंदरूनी घटनाक्रम पर नजर रखने वाले नेताओं का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से सायनी घोष सार्वजनिक कार्यक्रमों और राजनीतिक बैठकों में कम दिखाई दे रही थीं। सोशल मीडिया पर भी उनकी सक्रियता कम हो गई थी।
इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि पार्टी के भीतर सबकुछ सामान्य नहीं है। अब बगावत की खबर सामने आने के बाद उन अटकलों को और बल मिल गया है।
बंगाल से दिल्ली तक राजनीतिक चर्चा तेज
सायनी घोष के संभावित अलग रुख ने सिर्फ बंगाल ही नहीं बल्कि दिल्ली की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। क्योंकि वे टीएमसी के युवा और लोकप्रिय चेहरों में गिनी जाती रही हैं। ऐसे में अगर उनका पार्टी से मोहभंग होता है तो यह ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तर पर बड़ा झटका माना जाएगा।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
अब सबकी नजर सायनी घोष के अगले कदम पर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सायनी घोष वास्तव में टीएमसी से दूरी बना रही हैं या फिर यह सिर्फ राजनीतिक अटकलें हैं। पार्टी की ओर से भी अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
लेकिन इतना तय है कि सायनी घोष का नाम बागी नेताओं के साथ जुड़ने के बाद बंगाल की राजनीति में नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है। अब सभी की नजर उनके अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हुई है।
