प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कर ली है। वर्ष 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद से लगातार सत्ता में बने रहते हुए उन्होंने 12 साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इसी के साथ वे लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले नेता बन गए हैं।
इस उपलब्धि के बाद भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया है। पार्टी का कहना है कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने कई बड़े फैसले लिए, जिनका असर देश की राजनीति और विकास की दिशा पर पड़ा है। इसी कारण जनता ने लगातार तीसरी बार भी मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताया।
हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड बनाना एक उपलब्धि जरूर है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं। तीसरे कार्यकाल में सरकार के सामने रोजगार सृजन, महंगाई पर नियंत्रण, आर्थिक विकास की गति बनाए रखना और किसानों से जुड़े मुद्दों का समाधान जैसी बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं।
इसके अलावा गठबंधन सरकार को संतुलित तरीके से चलाना भी मोदी सरकार के लिए अहम परीक्षा माना जा रहा है। विभिन्न सहयोगी दलों की अपेक्षाओं और क्षेत्रीय हितों के बीच तालमेल बनाना केंद्र सरकार के लिए आसान नहीं होगा। आने वाले वर्षों में सरकार के फैसले यह तय करेंगे कि यह रिकॉर्ड केवल एक उपलब्धि बनकर रह जाता है या फिर नए राजनीतिक मानदंड स्थापित करता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतिहास में नाम दर्ज कराने के बाद अब प्रधानमंत्री मोदी की असली परीक्षा उनके तीसरे कार्यकाल के प्रदर्शन से होगी। जनता की उम्मीदें पहले से कहीं अधिक हैं और आने वाले समय में सरकार को इन उम्मीदों पर खरा उतरना होगा।
